लोग जब प्रेम की चर्चा करते हैँ जी हाँ, चर्चा करते हैँ क्योकि प्रेम करना थोड़ा दुःसाध्य है!
तो जब वो प्रेम की चर्चा करते हैँ तब एक शब्द जो मै बहुधा सुनता या पढता हूँ, वो है "अनकँडिशनल लव" ये शब्द मेरी समझ से थोड़ा परे है, अगर कोई कँडीशन नही है तो इस शब्द की आवश्यकता क्या है!
लेकिन नही अब ये अनकँडीशनल होना कँडीशन बन गया, जो मी लोगो ने इसके मानक तय कर रखे होँगे!
प्रेम कोई नदी नही है, जिसकी कोई कँडीशन होकि उसे दो किनारो के बीच ही बहना होगा!
प्रेम तो सागर की भाँति है तुम्हे चारो तरफ से घेरे हुए, सागर के वस्तुतः स्कोई किनारे नही होते, किनारो जैसे प्रतीत होता है जैसे दूर धरती पर देखने से क्षितिज का आभास होता है! क्षितिज है नही, क्योकि पृथ्वी गोल है उसका कोई किनारा नही है!
हमारी पृथ्वी का ७० प्रतिशत भाग जल है वस्तुतः तो पृथ्वी ही जल मे है!
ऐसा ही प्रेम है उसके आस-पास कँडीशन-अनकँडीशन की बाड़ेँ मत बनाओ, वरना तुम ही हानि मे पड़ोगे, उस बाड़ के भीतर जितना प्रेम तुम सागर मे विलीन होने से रोक लोगे वो एक दिन सड़ने लगेगा अँततः तुम पछताओगे!
"अखिल ब्रह्माण्डनायक के चरणो मे नमन"
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Tuesday, August 22, 2017
UnConditional Love
इंसानियत
"इंसानों से प्रेम करो इंसानियत से नहीं, इंसान तो कहीं मिल भी जाएगा इंसानियत कहीं नहीं मिलेगी"
~आनँद
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अनहद में बिसराम(मेरा स्वर्णिम भारत)
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"इंसानों से प्रेम करो इंसानियत से नहीं, इंसान तो कहीं मिल भी जाएगा इंसानियत कहीं नहीं मिलेगी" ~आनँद